आग कितनी है... | ग़ज़ल
आग कितनी है बता अंगार में/जान आयेगी तभी दो चार में - गिरेन्द्रसिंह भदौरिया प्राण की ग़ज़ल। Hindi Ghazal by Girendra Singh Bhadoria Pran.
कविता पढ़ेंआग कितनी है बता अंगार में/जान आयेगी तभी दो चार में - गिरेन्द्रसिंह भदौरिया प्राण की ग़ज़ल। Hindi Ghazal by Girendra Singh Bhadoria Pran.
कविता पढ़ेंरखकर अपनी आंख में-गुलशन मदान की ग़ज़ल।
कविता पढ़ेंबदन पे जिसके - नीरज की ग़ज़ल। Hindi Ghazal by Neeraj.
कविता पढ़ेंजिस तिनके को लोगों ने बेकार कहा था - ज्ञानप्रकाश विवेक की ग़ज़ल. Hindi Ghazal by Gyan Prakash Vivek
कविता पढ़ेंमेरी औक़ात का ऐ दोस्त शगूफ़ा न बना - ज्ञानप्रकाश विवेक की ग़ज़ल. Hindi Ghazal by Gyan Prakash Vivek
कविता पढ़ेंमिलती हैं आजकल - गुलशन मदान की गज़ल। Hindi Ghazal by Gulshan Madan.
कविता पढ़ेंबेच डाला जिस्म और ईमान रोटी के लिए - गिरीश पंकज की ग़ज़ल।
कविता पढ़ेंवो कभी दर्द का चर्चा नहीं होने देता - ज्ञानप्रकाश विवेक की ग़ज़ल. Hindi Ghazal by Gyan Prakash Vivek
कविता पढ़ेंतुम मेरी बेघरी पे बड़ा काम कर गए - ज्ञानप्रकाश विवेक की ग़ज़ल. Hindi Ghazal by Gyan Prakash Vivek
कविता पढ़ेंअब के सावन में - नीरज की ग़ज़ल. Hindi Ghazal by Neeraj
कविता पढ़ेंहलक में अब साँस भी फंसने लगी है - गौरव सक्सेना की ग़ज़ल. Hindi Ghazal by Gaurav Saxena.
कविता पढ़ेंआप क्यों दिल को बचाते हैं यों टकराने से - गुलाब खंडेलवाल की ग़ज़ल. Hindi Ghazal by Gulab khandelwal
कविता पढ़ेंकभी दो क़दम - गुलाब खंडेलवाल की ग़ज़ल. Hindi Ghazal by Gulab khandelwal
कविता पढ़ेंमन में रहे उमंग तो समझो होली है - गिरीश पंकज की होली ग़ज़ल
कविता पढ़ेंज्ञानप्रकाश विवेक की ग़ज़ल - किसी के दुख में रो उट्ठूं कुछ ऐसी तर्जुमानी दे. Ghazal by Gyanprakash Vivek.
कविता पढ़ेंज्ञानप्रकाश विवेक की ग़ज़ल. Ghazal by Gyanprakash Vivek.
कविता पढ़ेंज्ञानप्रकाश विवेक की ग़ज़लें. Ghazals by Gyanprakash Vivek
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