अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

शैल चतुर्वेदी | Shail Chaturwedi साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 10

शैल चतुर्वेदी | Shail Chaturwedi

टूट गयी खटिया | हास्य-कविता

हे वोटर महाराज,
आप नहीं आये आखिर अपनी हरकत से बाज़
नोट हमारे दाब लिये और वोट नहीं डाला
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कवि फ़रोश | पैरोडी

जी हाँ, हुज़ूर, मैं कवि बेचता हूँ
मैं तरह-तरह के कवि बेचता हूँ
मैं किसिम-किसिम के कवि बेचता हूँ।
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व्यंग्यकार से 

हमनें एक बेरोज़गार मित्र को पकड़ा
और कहा, "एक नया व्यंग्य लिखा है, सुनोगे?"
तो बोला, "पहले खाना खिलाओ।"
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कार सरकार | हास्य

नए-नए मंत्री ने 
अपने ड्राइवर से कहा— 
‘आज कार हम चलाएँगे।’ 
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लेन-देन

एक महानुभाव हमारे घर आए
उनका हाल पूछा
तो आँसू भर लाए,
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तुम वाकई गधे हो

एक गधा
दूसरे गधे से मिला
तो बोला- "कहो यार कैसे हो?"
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प्रश्न

प्रश्न था - " नाम ?"
हमने लिख दिया - "बदनाम"
"काम"
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बाजार का ये हाल है | हास्य व्यंग्य संग्रह

 बाज़ार का ये हाल है  - हास्य-व्यंग्य-संग्रह
 
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सौदागर ईमान के

आँख बंद कर सोये चद्दर तान के,
हम ही हैं वो सेवक हिन्दुस्तान के ।
बहते-बहते पार लगे हैं हम चुनाव की बाढ़ में,
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तेरे भीतर अगर नदी होगी | ग़ज़ल

तेरे भीतर अगर नदी होगी
तो समंदर से दोस्ती होगी
कोई खिड़की अगर खुली होगी
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शैल चतुर्वेदी | Shail Chaturwedi का जीवन परिचय (Biography)

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