शैल चतुर्वेदी | Shail Chaturwedi साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 10
टूट गयी खटिया | हास्य-कविता
हे वोटर महाराज,
आप नहीं आये आखिर अपनी हरकत से बाज़
नोट हमारे दाब लिये और वोट नहीं डाला
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आप नहीं आये आखिर अपनी हरकत से बाज़
नोट हमारे दाब लिये और वोट नहीं डाला
कवि फ़रोश | पैरोडी
जी हाँ, हुज़ूर, मैं कवि बेचता हूँ
मैं तरह-तरह के कवि बेचता हूँ
मैं किसिम-किसिम के कवि बेचता हूँ।
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मैं तरह-तरह के कवि बेचता हूँ
मैं किसिम-किसिम के कवि बेचता हूँ।
व्यंग्यकार से
हमनें एक बेरोज़गार मित्र को पकड़ा
और कहा, "एक नया व्यंग्य लिखा है, सुनोगे?"
तो बोला, "पहले खाना खिलाओ।"
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और कहा, "एक नया व्यंग्य लिखा है, सुनोगे?"
तो बोला, "पहले खाना खिलाओ।"
सौदागर ईमान के
आँख बंद कर सोये चद्दर तान के,
हम ही हैं वो सेवक हिन्दुस्तान के ।
बहते-बहते पार लगे हैं हम चुनाव की बाढ़ में,
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हम ही हैं वो सेवक हिन्दुस्तान के ।
बहते-बहते पार लगे हैं हम चुनाव की बाढ़ में,
तेरे भीतर अगर नदी होगी | ग़ज़ल
तेरे भीतर अगर नदी होगी
तो समंदर से दोस्ती होगी
कोई खिड़की अगर खुली होगी
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तो समंदर से दोस्ती होगी
कोई खिड़की अगर खुली होगी