देहात का विरला ही कोई मुसलमान प्रचलित उर्दू भाषा के दस प्रतिशत शब्दों को समझ पाता है। - साँवलिया बिहारीलाल वर्मा।

बाजार का ये हाल है | हास्य व्यंग्य संग्रह

बाज़ार का ये हाल है | शैल चतुर्वेदी

 बाज़ार का ये हाल है  - हास्य-व्यंग्य-संग्रह

 

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