पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी साहित्य Hindi Literature Collections of Padumlal Punnalal Bakshi
कुल रचनाएँ: 5
झलमला
मैं बरामदे में टहल रहा था। इतने में मैंने देखा कि विमला दासी अपने आंचल के नीचे एक प्रदीप लेकर बड़ी भाभी के कमरे की ओर जा रही है। मैंने पूछा, 'क्यों री! यह क्य...
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गूँगी | कहानी
गूँगी का नाम था गोमती। पर वह खूब बोलती थी। इसलिए मैंने उसका नाम गूँगी रख दिया था। गूँगी बन जाने पर भी गोमती की वाक्-शक्ति कम नहीं हुई। तो भी सब लोग उसे गूँग?...
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