मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।

कृतघ्नता

कृतघ्नता | Hindi poem by Padumlal Punnalal Bakshi

चन्द्र हरता है
निशा की कालिमा,
हृदय की देता
उसे है लालिमा॥

किन्तु होकर लोक-
निन्दा से अशंक,
निशा देती है
उसे अपना कलंक॥

-पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी

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