अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

कृतघ्नता

कृतघ्नता | Hindi poem by Padumlal Punnalal Bakshi

चन्द्र हरता है
निशा की कालिमा,
हृदय की देता
उसे है लालिमा॥

किन्तु होकर लोक-
निन्दा से अशंक,
निशा देती है
उसे अपना कलंक॥

-पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी

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