धर्मवीर भारती | Dhramvir Bharti साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 8
क्योंकि सपना है अभी भी
...क्योंकि सपना है अभी भी
इसलिए तलवार टूटी अश्व घायल
कोहरे डूबी दिशाएं
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इसलिए तलवार टूटी अश्व घायल
कोहरे डूबी दिशाएं
गुल की बन्नो
‘‘ऐ मर कलमुँहे !' अकस्मात् घेघा बुआ ने कूड़ा फेंकने के लिए दरवाजा खोला और चौतरे पर बैठे मिरवा को गाते हुए देखकर कहा, ‘‘तोरे पेट में फोनोगिराफ उलियान ?...
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पूजा गीत
जिस दिन अपनी हर आस्था तिनके-सी टूटे
जिस दिन अपने अन्तरतम के विश्वास सभी निकले झूठे !
उस दिन
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जिस दिन अपने अन्तरतम के विश्वास सभी निकले झूठे !
उस दिन