मुस्लिम शासन में हिंदी फारसी के साथ-साथ चलती रही पर कंपनी सरकार ने एक ओर फारसी पर हाथ साफ किया तो दूसरी ओर हिंदी पर। - चंद्रबली पांडेय।

अविष्ट

अविष्ट | Hindi poem by Dharmvir Bharati

दुख आया
घुट-घुट कर
मन-मन मैं खीज गया

सुख आया
लुट-लुट कर मैं छीज गया

क्या केवल पूंजी के बल
मैंने जीवन को ललकारा था

वह मैं नहीं था, शायद वह
कोई और था
उसने तो प्यार किया, रीत गया, टूट गया
पीछे मैं छूट गया

-धर्मवीर भारती
[सात गीत-वर्ष, भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन, 1964]

 

 

 

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