अंग्रेजी सर पर ढोना डूब मरने के बराबर है। - सम्पूर्णानंद

एक वाक्य

एक वाक्य | Hindi poem by Dharmvir Bharati

चेक बुक हो पीली या लाल,
दाम सिक्के हों या शोहरत --
कह दो उनसे
जो ख़रीदने आये हों तुम्हें
हर भूखा आदमी बिकाऊ नहीं होता है!

-धर्मवीर भारती
[सात गीत वर्ष]

 

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