आनन्द विश्वास | Anand Vishvas साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 30
गरमागरम थपेड़े लू के
गरमागरम थपेड़े लू के, पारा सौ के पार हुआ है,
इतनी गरमी कभी न देखी, ऐसा पहली बार हुआ है।
नींबू - पानी, ठंडा - बंडा,
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इतनी गरमी कभी न देखी, ऐसा पहली बार हुआ है।
नींबू - पानी, ठंडा - बंडा,
बच्चो, चलो चलाएं चरखा
बच्चो, चलो चलाएं चरखा,
बापू जी ने इसको परखा।
चरखा अगर चलेगा घर-घर,
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बापू जी ने इसको परखा।
चरखा अगर चलेगा घर-घर,
आई हेट यू, पापा!
भास्कर के घर से कुछ ही दूरी पर स्थित है सन्त श्री शिवानन्द जी का आश्रम। दिव्य अलौकिक शक्ति का धाम। शान्त, सुन्दर और रमणीय स्थल। जहाँ ध्यान, योग और ज्ञान की ...
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बेटी-युग
सतयुग, त्रेता, द्वापर बीता, बीता कलयुग कब का,
बेटी-युग के नए दौर में, हर्षाया हर तबका।
बेटी-युग में खुशी-खुशी है,
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बेटी-युग के नए दौर में, हर्षाया हर तबका।
बेटी-युग में खुशी-खुशी है,
मामू की शादी में
मामू की शादी में हमने, खूब मिठाई खाई।
नाचे-कूदे,गाने गाए, जमकर मौज़ मनाई।
आगे-आगे बैण्ड बजे थे,
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नाचे-कूदे,गाने गाए, जमकर मौज़ मनाई।
आगे-आगे बैण्ड बजे थे,
जब सुनोगे गीत मेरे...
दर्द की उपमा बना मैं जा रहा हूँ,
पीर की प्रतिमा बना मैं जा रहा हूँ।
दर्द दर-दर का पिये मैं, कब तलक घुलता रहूँ।
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पीर की प्रतिमा बना मैं जा रहा हूँ।
दर्द दर-दर का पिये मैं, कब तलक घुलता रहूँ।
मेरे देश की माटी सोना | गीत
मेरे देश की माटी सोना, सोने का कोई काम ना,
जागो भैया भारतवासी, मेरी है ये कामना।
दिन तो दिन है रातों को भी थोड़ा-थोड़ा जागना,
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जागो भैया भारतवासी, मेरी है ये कामना।
दिन तो दिन है रातों को भी थोड़ा-थोड़ा जागना,
रो उठोगे मीत मेरे
दर्द की उपमा बना मैं जा रहा हूँ,
पीर की प्रतिमा बना मैं जा रहा हूँ।
दर्द दर-दर का पिये मैं,कब तलक घुलता रहूँ।
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पीर की प्रतिमा बना मैं जा रहा हूँ।
दर्द दर-दर का पिये मैं,कब तलक घुलता रहूँ।
एक आने के दो समोसे | कहानी
बात उन दिनों की है जब एक आने के दो समोसे आते थे और एक रुपये का सोलह सेर गुड़। अठन्नी-चवन्नी का जमाना था तब। प्राइमरी स्कूल के बच्चे पेन-पेन्सिल से कागज पर न?...
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सजनवा के गाँव चले
सूरज उगे या शाम ढले,
मेरे पाँव सजनवा के गाँव चले।
सपनों की रंगीन दुनियाँ लिये,
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मेरे पाँव सजनवा के गाँव चले।
सपनों की रंगीन दुनियाँ लिये,
चिड़िया फुर्र
अभी दो चार दिनों से देवम के घर के बरामदे में चिड़ियों की आवाजाही कुछ ज्यादा ही हो गई थी। चिड़ियाँ तिनके ले कर आती, उन्हें ऊपर रखतीं और फिर चली जातीं दुबारा,...
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पीछे मुड़ कर कभी न देखो
पीछे मुड़ कर कभी न देखो, आगे ही तुम बढ़ते जाना,
उज्ज्वल ‘कल’ है तुम्हें बनाना, वर्तमान ना व्यर्थ गँवाना।
संधर्ष आज तुमको करना है,
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उज्ज्वल ‘कल’ है तुम्हें बनाना, वर्तमान ना व्यर्थ गँवाना।
संधर्ष आज तुमको करना है,
मैंने जाने गीत बिरह के
मैंने जाने गीत बिरह के, मधुमासों की आस नहीं है,
कदम-कदम पर मिली विवशता, साँसों में विश्वास नहीं है।
छल से छला गया है जीवन,
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कदम-कदम पर मिली विवशता, साँसों में विश्वास नहीं है।
छल से छला गया है जीवन,
नानी वाली कथा-कहानी
नानी वाली कथा-कहानी, अब के जग में हुई पुरानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
बेटी-युग में बेटा-बेटी,
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बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
बेटी-युग में बेटा-बेटी,
सूरज दादा कहाँ गए तुम
सूरज दादा कहाँ गए तुम,
काहे ईद का चाँद भए तुम।
घना अँधेरा, काला - काला,
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काहे ईद का चाँद भए तुम।
घना अँधेरा, काला - काला,
चलो, करें जंगल में मंगल
चलो, करें जंगल में मंगल,
संग प्रकृति के जी लें दो पल।
बतियाएं कुछ अपने मन की,
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संग प्रकृति के जी लें दो पल।
बतियाएं कुछ अपने मन की,
आया मधुऋतु का त्योहार
खेत-खेत में सरसों झूमे, सर-सर बहे बयार,
मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार।
धानी रंग से रंगी धरा,
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मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार।
धानी रंग से रंगी धरा,
अगर सीखना कुछ चाहो तो...
अगर सीखना कुछ चाहो तो,
हर चीज तुम्हें शिक्षा देगी।
शर्त यही है कुछ पाने की,
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हर चीज तुम्हें शिक्षा देगी।
शर्त यही है कुछ पाने की,
फूल नहीं तोड़ेंगे हम
14 नवम्बर, बाल-दिवस, बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू जी का जन्म-दिवस, देवम के स्कूल में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। सभी छात्र बड़े उत्साह और उमंग के साथ इस ?...
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