अलका सिन्हा साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 5
जन्मदिन मुबारक
बगल के कमरे से उठती हुई दबी-दबी हँसी की आवाज उसके कमरे से टकरा रही है। ये हँसी है या चूड़ियों की खनक! पता नहीं, शायद दोनों ही आवाजें हैं। इन आवाजों के सिवा है ?...
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मैं करती हूँ चुमौना
कोहरे की ओढ़नी से झांकती है
संकुचित-सी वर्ष की पहली सुबह यह
स्वप्न और संकल्प भर कर अंजुरी में
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संकुचित-सी वर्ष की पहली सुबह यह
स्वप्न और संकल्प भर कर अंजुरी में
मिनी
मिनी ने कमरे में धीरे से झांका, मम्मी सो रही थीं। यह और प्रतीक्षा नहीं कर सकती थी। उसने हलकी-सी आवाज लगाई।
"मम्मी।"
मम्मी ने पता नहीं सुना या नहीं, पर उन्ह?...
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"मम्मी।"
मम्मी ने पता नहीं सुना या नहीं, पर उन्ह?...