नागरी प्रचार देश उन्नति का द्वार है। - गोपाललाल खत्री।

जिंदगी की चादर

जिंदगी की चादर | अलका सिन्हा की कविता | Hindi poem by Alka Sinha

जिंदगी को जिया मैंने
इतना चौकस होकर
जैसे कि नींद में भी रहती है सजग
चढ़ती उम्र की लड़की
कि कहीं उसके पैरों से
चादर न उघड़ जाए।

- अलका सिन्हा

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