भाषा देश की एकता का प्रधान साधन है। - (आचार्य) चतुरसेन शास्त्री।
नव वर्ष
नव वर्ष
हर्ष नव
जीवन उत्कर्ष नव।
नव उमंग,
नव तरंग,
जीवन का नव प्रसंग।
नवल चाह,
नवल राह,
जीवन का नव प्रवाह।
गीत नवल,
प्रीति नवल,
जीवन की रीति नवल,
जीवन की नीति नवल,
जीवन की जीत नवल!
- हरिवंश राय बच्चन
[सतरंगिनी]
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)