देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

जिद्दी मक्खी

रचनाकार: दिविक रमेश
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कितनी जिद्दी हो तुम मक्खी
अभी उड़ाती फिर आ जाती!
हां मैं भी करती हूं लेकिन
मां मनाती झट मन जाती।

मां तेरी समझाती होगी
जॆसे मां मेरी समझाती ।
जो बच्चे होते हॆं जिद्दी
उनको अक्ल कभी ना आती।

अगर स्कूल तुम जाती होती
तुम भी समझदार बन जाती।
अच्छी-अच्छी बातें कितनी
टीचर जी तुमको समझाती!

-दिविक रमेश

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