देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

बन जाती हूं

रचनाकार: दिविक रमेश
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चींचीं चींचीं
कर के तो मैं
चिड़िया तो नहीं
बन जाती हूं।

चूंचूं चूंचूं
करके तो मैं
चूहा तो नहीं
बन जाती हूं।

मेंमें मेंमें
करके तो मैं
बकरी तो नहीं
बन जाती हूं।

पर सीख कर
अच्छी बातें
अच्छी लड़की
बन जाती हूं।

-दिविक रमेश

 

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