विदेशी भाषा के शब्द, उसके भाव तथा दृष्टांत हमारे हृदय पर वह प्रभाव नहीं डाल सकते जो मातृभाषा के चिरपरिचित तथा हृदयग्राही वाक्य। - मन्नन द्विवेदी।

नया साल : नया गीत (काव्य)

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Author: विनिता तिवारी

नये साल में गीत लिखें
कुछ नये भाव के  ऐसे
हर शाखा पर पत्र-पुष्प नव 
ऋतु बसंत में  जैसे

ख़ुशियाँ हों हर घर आँगन में 
प्रेम प्यार हो मन में 
श्रद्धा भाव रहे पूजा में
धैर्य, ध्यान-चिंतन में 

सोचें, दुखियों के दुख हम 
कब मिल-बाँटेंगे,  कैसे?
नये साल में ….

धर्म एक हो मानवता का
फूले फले  निरन्तर 
जाति-धर्म, नस्लों, रंगों का
रहे न कोई अंतर

कब तक मूक सहेंगे 
भेदभाव का तांडव ऐसे
नये साल में …….

युवा बनें सुशिक्षित मानव
त्यागें भय-आडम्बर 
रखें नियंत्रण  खुद  अपना 
अपनी धरती, अम्बर पर

चढ़ें न मन पर रंग कभी 
इस जग के ऐसे वैसे

नये साल में गीत लिखें  
कुछ नये भाव के  ऐसे ॥

-विनिता तिवारी, अमेरिका

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