
गीत, गज़ल, कवितायें, कहानी रचते चले गये
कदम कदम सारे जीवन हम, यों तो छल गये
सुने, सराहे, या बिन देखे यों ही परे करे
माथे लगाये याकि उपेक्षा करके दूर धरे
बिना आंकलन किये लाभ का खरचे चले गये
कदम कदम सारे जीवन हम यों तो छले गये
‘स्वांत: सुखाय तो तुलसी ने भी लिखी नहीं होगी
लिया राम का नाम राह जब दिखी नहीं होगी
मरुथल मिला, मिली बाधाये, पादप हरे भरे
हर बाधा को जीत बढे वे पथ पर बिना डरे
इसी तरह हम भी बस लिखते दिखते चले गये
कदम कदम सारे जीवन हम यों तो छले गये
‘नहीं अपेक्षा रखो किसी से’ रखकर दुःख होगा
‘नेकी कर दरिया में डालो‘ मन प्रमुदित होगा
सिर्फ कर्म कर सकते थे सो , करते चले गये
गीत गज़ल कविताएँ कहानी, रचते चले गये
कदम कदम सारे जीवन हम यों तो छले गये
आये थे अधिकार जताते–कुछ मन से टूटे
चल न सके दो कदम साथ सब अनायास छूटे
किसे बताते मोती माणिक मनके किसने लूटे
टूटा ह्रदय मगर अधरों से सिर्फ गीत फूटे
मीत गीत को बना निरंतर चलते चले गये
कदम कदम सारे जीवन हम, यों तो छले गये
गाना–रोना दोनों ही तो मुझे नहीं आता है
टूटे फूटे लफ्जों में बस दुःख कहना आता है
दस्तक देकर सुख दरवाज़े से ही चले गये
कदम कदम सारे जीवन हम यों ही छले गये
गीत, गज़ल, कवितायें, कहानी, रचते चले गये
-अरविंद पथिक
प्रधान सम्पादक, साहित्य सप्तक
सेक्टर -4 B/1048 ,वसुंधरा ,आकाशगंगा अपार्टमेन्ट ,गाज़ियाबाद
मो० 9910416496,EMAIL arvind61972@gmail.com
अरविंद पथिक : परिचय
जन्म : 11 फरवरी 1972 शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
मुख्य कृतियाँ
कविता संग्रह
1) मै अंगार लिखता हूँ
2) अक्षांश अनुभूतियों के
3) क्यों लिखूं मैं
4) बस थोड़ा आशीष चाहिए
5) महाकाव्य : बिस्मिल चरित
6) व्यंग्य संग्रह : जुगाड़ तकनीक के विविध आयाम
7) उपन्यास : अँधेरे कोने @फेसबुक.कॉम
8) असभ्यता का आक्रमण
9) संपादन सहयोग : आकाशवाणी के हिंदी सेवी
सम्मान : राष्ट्रीय युवा कवि सम्मान (भाऊदेवरस संस्थान लखनऊ )
साहित्य श्री सम्मान (अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन )
विभिन्न संस्थाओं द्वारा शताधिक सम्मान एवं पुरस्कार
सम्प्रति :प्रधान सम्पादक ‘साहित्य सप्तक ‘हिंदी मासिक
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