
न्यूज़ीलैंड (22 अगस्त 2026) : ऑस्ट्रेलिया में अल्बनीज़ी सरकार ने स्कूली शिक्षा में भारतीय भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की घोषणा की है।
सरकार ने कम्युनिटी लैंग्वेज स्कूल्स ग्रांट्स प्रोग्राम (Community Language Schools Grants Program) के तहत हिंदी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, मलयालम, तमिल, तेलुगू और उर्दू को बढ़ावा देने के लिए नई फंडिंग की घोषणा की है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को वर्ष 11 और 12 (senior secondary) तक इन भारतीय भाषाओं की पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है।
आठ प्रमुख भारतीय भाषाओं को मिलेगा बढ़ावा
इस अनुदान के माध्यम से हिंदी, पंजाबी, तमिल, बंगाली, गुजराती, मलयालम, तेलुगु और उर्दू जैसी प्रमुख भारतीय भाषाओं के लिए नए शिक्षण संसाधन तैयार किए जाएंगे, शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और 11वीं-12वीं कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम का विस्तार किया जाएगा।
इन प्रमुख परियोजनाओं और संस्थानों को मिलेगा समर्थन
ऑस्ट्रेलियाई नेशनल यूनिवर्सिटी (ANU): हिंदी सहित अन्य सामुदायिक भाषा शिक्षकों के लिए संसाधन और व्यावसायिक विकास प्रदान करने के उद्देश्य से 'डिजिटल लैंग्वेज हब्स' विकसित करेगी।
सिडनी यूनिवर्सिटी: कम्युनिटी लैंग्वेज स्कूलों को 7वीं से 12वीं कक्षा तक की कक्षाएं शुरू करने, नए शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और राष्ट्रीय स्तर पर सुलभ शिक्षण सामग्री विकसित करने में मदद करेगी।
तमिल स्टडी सेंटर होमबुश इंक: होमबुश में तमिल भाषा प्रवाह कार्यक्रम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा, जिसे बाद में पूरे न्यू साउथ वेल्स (NSW) में विस्तारित किया जाएगा और इसके ऑनलाइन संसाधन राष्ट्रीय स्तर पर साझा किए जाएंगे।
NSW फेडरेशन ऑफ तमिल स्कूल्स: माध्यमिक छात्रों के बीच तमिल शिक्षण को मजबूत करने के लिए नए शिक्षण संसाधन और वास्तविक दुनिया में भाषा उपयोग के अवसर प्रदान करेगा।
कम्युनिटी लैंग्वेजेस विक्टोरिया: एक ऑनलाइन 'टीचर्स हब' स्थापित करेगी और मिडिल स्कूल से सीनियर सेकेंडरी तक एशियाई भाषा शिक्षण को मजबूत करेगी।
बहुसांस्कृतिक मामलों की मंत्री डॉ. ऐन एली (Dr Anne Aly) ने कहा, "भाषा युवाओं को उनके परिवार, संस्कृति और समुदाय से जोड़ती है। इसके साथ ही यह पढ़ाई, रोजगार और नए अवसरों के द्वार खोलती है। यह अनुदान अधिक से अधिक छात्रों को कुशल शिक्षकों और उच्च गुणवत्ता वाले संसाधनों की मदद से अपनी सीनियर सेकेंडरी कक्षाओं तक भारतीय भाषाएं सीखने में सक्षम बनाएगा। ऑस्ट्रेलिया की भाषाई विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है।"
नागरिकता, सीमा शुल्क और बहुसांस्कृतिक मामलों की सहायक मंत्री जूलियन हिल (Julian Hill) ने कहा, "कम्युनिटी लैंग्वेज स्कूल युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़े रखने और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमारे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों और पड़ोसियों की भाषाएं बोलने में सक्षम ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की संख्या बढ़ना देश के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे छात्रों के लिए रोजगार और करियर के नए रास्ते खुलेंगे और क्षेत्र में हमारे आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।"
25.6 मिलियन डॉलर का व्यापक निवेश
यह नया अनुदान अल्बनीज़ी सरकार के वर्ष 2025-26 से शुरू होने वाले 25.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के चार वर्षीय कुल निवेश का हिस्सा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से 80 से अधिक भाषाओं को सीख रहे 90,000 से अधिक छात्रों को लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त, हाल ही में 85 कम्युनिटी लैंग्वेज स्कूलों के बीच 4 वर्षों के लिए 1.47 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि आवंटित की गई थी ताकि वे नए पाठ्यक्रम और शिक्षक प्रशिक्षण सामग्री विकसित कर सकें।
ऑस्ट्रेलिया की अल्बनीज़ी सरकार ने कम्युनिटी लैंग्वेज स्कूल्स ग्रांट्स प्रोग्राम (Community Language Schools Grants Program) के तहत हिंदी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, मलयालम, तमिल, तेलुगू और उर्दू को बढ़ावा देने के लिए नई फंडिंग की घोषणा की है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को वर्ष 11 और 12 (senior secondary) तक इन भारतीय भाषाओं की पढ़ाई जारी रखने में मदद करना है।
[भारत-दर्शन समाचार]
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