भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

विष्णु नागर साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 2

विष्णु नागर

मैं और कुछ नहीं कर सकता था

मैं क्या कर सकता था
किसी का बेटा मर गया था
सांत्वना के दो शब्द कह सकता था
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सवाल

ईश्वर से पूछा गया कि उन्हें कौन-सा मौसम अच्छा लगता है-ठंड का, गर्मी का या बरसात का?
ईश्वर ने कहा, "मूर्ख यह सवाल गरीबों से किया करते हैं, ईश्वर से नहीं।"
-विष्ण...
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विष्णु नागर का जीवन परिचय (Biography)

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