उपेन्द्रनाथ अश्क | Upendranath Ashk साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 5
आज मेरे आँसुओं में, याद किस की मुसकराई? | गीत
आज मेरे आँसुओं में, याद किस की मुसकराई?
शिशिर ऋतु की धूप-सा सखि, खिल न पाया मिट गया सुख,
और फिर काली घटा-सा, छा गया मन-प्राण पर दुख,
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शिशिर ऋतु की धूप-सा सखि, खिल न पाया मिट गया सुख,
और फिर काली घटा-सा, छा गया मन-प्राण पर दुख,
इश्क और वो इश्क की जांबाज़ियाँ | ग़ज़ल
इश्क और वो इश्क की जांबाज़ियाँ
हुस्न और ये हुस्न की दम साज़ियाँ
वक्ते-आख़्रिर है, तसल्ली हो चुकी
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हुस्न और ये हुस्न की दम साज़ियाँ
वक्ते-आख़्रिर है, तसल्ली हो चुकी
उसने मेरा हाथ देखा | कविता
उसने मेरा हाथ देखा और सिर हिला दिया,
"इतनी भाव प्रवीणता
दुनिया में कैसे रहोगे!
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"इतनी भाव प्रवीणता
दुनिया में कैसे रहोगे!
डाची | कहानी
काट* 'पी सिकंदर' के मुसलमान जाट बाक़र को अपने माल की ओर लालच भरी निगाहों से तकते देखकर चौधरी नंदू पेड़ की छाँह में बैठे-बैठे अपनी ऊंची घरघराती आवाज़ में ललक...
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