अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

उपेन्द्रनाथ अश्क | Upendranath Ashk साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 5

उपेन्द्रनाथ अश्क | Upendranath Ashk

आज मेरे आँसुओं में, याद किस की मुसकराई? | गीत

आज मेरे आँसुओं में, याद किस की मुसकराई?
शिशिर ऋतु की धूप-सा सखि, खिल न पाया मिट गया सुख,
और फिर काली घटा-सा, छा गया मन-प्राण पर दुख,
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इश्क और वो इश्क की जांबाज़ियाँ | ग़ज़ल

इश्क और वो इश्क की जांबाज़ियाँ
हुस्न और ये हुस्न की दम साज़ियाँ
वक्ते-आख़्रिर है, तसल्‍ली हो चुकी
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उसने मेरा हाथ देखा | कविता

उसने मेरा हाथ देखा और सिर हिला दिया,
"इतनी भाव प्रवीणता
दुनिया में कैसे रहोगे!
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सड़कों पे ढले साये | कविता

सड़कों पे ढले साये 
दिन बीत गया, राहें
हम देख न उकताये! 
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डाची | कहानी

काट* 'पी सिकंदर' के मुसलमान जाट बाक़र को अपने माल की ओर लालच भरी निगाहों से तकते देखकर चौधरी नंदू पेड़ की छाँह में बैठे-बैठे अपनी ऊंची घरघराती आवाज़ में ललक...
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उपेन्द्रनाथ अश्क | Upendranath Ashk का जीवन परिचय (Biography)

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