देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

सड़कों पे ढले साये | कविता

सड़कों पे ढले साये 
दिन बीत गया, राहें
हम देख न उकताये! 

सड़कों पे ढले साये 
जिनको न कभी आना,
वे याद हमें आये!

सड़कों पे ढले साये
जो दुख से चिर-परिचित
कब दुख से घबराये!

-उपेन्द्रनाथ अश्क

 

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