त्रिलोक सिंह ठकुरेला साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 9
पापा, मुझे पतंग दिला दो
पापा, मुझे पतंग दिला दो,
भैया रोज उड़ाते हैं।
मुझे नहीं छूने देते हैं,
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भैया रोज उड़ाते हैं।
मुझे नहीं छूने देते हैं,
त्रिलोक सिंह ठकुरेला की मुकरियाँ
जब भी देखूं, आतप हरता।
मेरे मन में सपने भरता।
जादूगर है, डाले फंदा।
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मेरे मन में सपने भरता।
जादूगर है, डाले फंदा।
त्रिलोक सिंह ठकुरेला की कुण्डलिया
कुण्डलिया
मोती बन जीवन जियो, या बन जाओ सीप।
जीवन उसका ही भला, जो जीता बन दीप।।
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मोती बन जीवन जियो, या बन जाओ सीप।
जीवन उसका ही भला, जो जीता बन दीप।।
जीवन में नव रंग भरो
सीना ताने खड़ा हिमालय,
कहता कभी न झुकना तुम।
झर झर झर झर बहता निर्झर,
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कहता कभी न झुकना तुम।
झर झर झर झर बहता निर्झर,
प्यारे बादल
देखो, माँ! नभ में आ पहुँचे,
ये घनघोर सुघड़ बादल।
इन्हें देखकर इतराई, झूमी,
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ये घनघोर सुघड़ बादल।
इन्हें देखकर इतराई, झूमी,