देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

चिड़िया

घर में आती जाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

तिनके लेकर नीड़ बनाती ,
अपना घर परिवार सजाती ,
दाने चुन चुन लाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।। 

सुबह सुबह जल्दी जग जाती ,
मीठे स्वर में गाना गाती ,
हर दिन सुख बरसाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

कभी नहीं वह आलस करती ,
मेहनत  से वह कभी न डरती ,
रोज काम पर जाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।। 

हँसना , गाना  कभी न  भूलो ,
साहस हो तो नभ को छूलो ,
सबको यह सिखलाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

- त्रिलोक सिंह ठकुरेला

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।