नागरी प्रचार देश उन्नति का द्वार है। - गोपाललाल खत्री।

स्वरांगी साने साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 6

स्वरांगी साने

सपना

खुली आँखों से
सपना देखती
सपने को टूटता देखती
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पीहर

कविता में जाना
मेरे लिए पीहर जाने जैसा है।
मुक़ाम पर पहुँचते ही
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प्याज़

बहुत सारा
प्याज़ काटने बैठ जाती थी माँ।
कहती थी मसाला भूनना है।
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कछुआ

बचपन में कछुए को देखती
तो सोचती थी
क्या देखता होगा
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प्रतीक्षा

बेटी आने वाली है
यह सोच कर
उसकी आँखें सुपर बाजार हो जाती हैं
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कागज़

उन पीले ज़र्द कागज़ों के पास
कहने को बहुत कुछ था।
उन कोरे नए कागज़ों के पास
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स्वरांगी साने का जीवन परिचय (Biography)

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