मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।

सुभाष मुनेश्वर | न्यूज़ीलैंड साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

सुभाष मुनेश्वर | न्यूज़ीलैंड

मुर्गे जी महाराज

सुबह उठे कि दिये बाँग
मुर्गे जी महाराज
आप जगे औरों को जगाये
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नंगोना

जहाँ नंगोने की थारी
वहाँ जनता है उमड़ी भारी,
सिकुड़ गई चेहरे की चमड़ी
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प्रार्थना

हे मेरे ईश्वर, दे दे त्राण
दे कर मुझ की आत्म-ज्ञान
जीवन-मरण के इस चक्कर से
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सुभाष मुनेश्वर | न्यूज़ीलैंड का जीवन परिचय (Biography)

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