शिवमंगल सिंह सुमन साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 6
मिट्टी की महिमा
निर्मम कुम्हार की थापी से
कितने रूपों में कुटी-पिटी,
हर बार बिखेरी गई, किन्तु
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कितने रूपों में कुटी-पिटी,
हर बार बिखेरी गई, किन्तु
हम पंछी उन्मुक्त गगन के
हम पंछी उन्मुक्त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाऍंगे
कनक-तीलियों से टकराकर
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पिंजरबद्ध न गा पाऍंगे
कनक-तीलियों से टकराकर
मैं सूने में मन बहलाता
मेरे उर में जो निहित व्यथा
कविता तो उसकी एक कथा
छंदों में रो-गाकर ही मैं, क्षण-भर को कुछ सुख पा जाता
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कविता तो उसकी एक कथा
छंदों में रो-गाकर ही मैं, क्षण-भर को कुछ सुख पा जाता
गीत गाने को दिए पर स्वर नहीं
दे दिए अरमान अगणित
पर न उनकी पूर्ति दी,
कह दिया मन्दिर बनाओ
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पर न उनकी पूर्ति दी,
कह दिया मन्दिर बनाओ
वरदान माँगूँगा नहीं
यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।
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जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।