देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

शिवमंगल सिंह सुमन साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 6

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मिट्टी की महिमा

निर्मम कुम्हार की थापी से
कितने रूपों में कुटी-पिटी,
हर बार बिखेरी गई, किन्तु
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हम पंछी उन्मुक्त गगन के

हम पंछी उन्मुक्त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाऍंगे
कनक-तीलियों से टकराकर
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मैं सूने में मन बहलाता

मेरे उर में जो निहित व्यथा
कविता तो उसकी एक कथा
छंदों में रो-गाकर ही मैं, क्षण-भर को कुछ सुख पा जाता
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चलना हमारा काम है

गति प्रबल पैरों में भरी
फिर क्यों रहूँ दर-दर खडा
जब आज मेरे सामने
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गीत गाने को दिए पर स्वर नहीं

दे दिए अरमान अगणित
पर न उनकी पूर्ति दी,
कह दिया मन्दिर बनाओ
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वरदान माँगूँगा नहीं

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।
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शिवमंगल सिंह सुमन का जीवन परिचय (Biography)

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