डॉ रामदरश मिश्र साहित्य Hindi Literature Collections of Dr Ram Darash Mishra
कुल रचनाएँ: 4
खाली घर | कहानी
लगभग साल भर बाद घर जा रहा हूँ। एक अज्ञात भय की कंपकंपी मेरे मन को छू-छू जाती है...कैसा दिखेगा घर? कैसे दिखेंगे कमरे?
शाम होने को है। मैं गाँव के पास पहुँच गया ह...
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शाम होने को है। मैं गाँव के पास पहुँच गया ह...
बनाया है मैंने ये घर धीरे धीरे | ग़ज़ल
बनाया है मैंने ये घर धीरे धीरे
खुले मेरे ख़्वाबों के पर धीरे धीरे
किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला
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खुले मेरे ख़्वाबों के पर धीरे धीरे
किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला
जाने तू कैसे लिखता है | गीत
चेहरे पर न भंगिमाएँ हैं
वाणी में न अदा है कोई
आँखें भी तो खुली खुली हैं
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वाणी में न अदा है कोई
आँखें भी तो खुली खुली हैं