अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

डॉ रामदरश मिश्र साहित्य Hindi Literature Collections of Dr Ram Darash Mishra

कुल रचनाएँ: 4

डॉ रामदरश मिश्र

खाली घर | कहानी

लगभग साल भर बाद घर जा रहा हूँ। एक अज्ञात भय की कंपकंपी मेरे मन को छू-छू जाती है...कैसा दिखेगा घर? कैसे दिखेंगे कमरे?
शाम होने को है। मैं गाँव के पास पहुँच गया ह...
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मेरे जाने के बाद | कविता

छोड़ जाऊँगा
कुछ कविता, कुछ कहानियाँ, कुछ विचार
जिनमें होंगे
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बनाया है मैंने ये घर धीरे धीरे | ग़ज़ल

बनाया है मैंने ये घर धीरे धीरे
खुले मेरे ख़्वाबों के पर धीरे धीरे
किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला
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जाने तू कैसे लिखता है | गीत

चेहरे पर न भंगिमाएँ हैं
वाणी में न अदा है कोई
आँखें भी तो खुली खुली हैं
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डॉ रामदरश मिश्र का जीवन परिचय (Biography)

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