रबीन्द्रनाथ टैगोर | Rabindranath Tagore साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 31
राजा का महल | बाल-कविता
नहीं किसी को पता कहाँ मेरे राजा का राजमहल!
अगर जानते लोग, महल यह टिक पाता क्या एक पल?
इसकी दीवारें चाँदी की, छत सोने की धात की,
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अगर जानते लोग, महल यह टिक पाता क्या एक पल?
इसकी दीवारें चाँदी की, छत सोने की धात की,
गूंगी
कन्या का नाम जब सुभाषिणी रखा गया था तब कौन जानता था कि वह गूंगी होगी। इसके पहले, उसकी दो बड़ी बहनों के सुकेशिनी और सुहासिनी नाम रखे जा चुके थे, इसी से तुकबन?...
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प्रश्न | लघुकथा
बाप श्मशान से घर लौटा।
सात वर्ष का लड़का--उघाड़े बदन, गले में सोने का ताबीज़--अकेला गली वाले जंगल के पास खड़ा था।
क्या सोच रहा था, उसे खुद नहीं मालूम।
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सात वर्ष का लड़का--उघाड़े बदन, गले में सोने का ताबीज़--अकेला गली वाले जंगल के पास खड़ा था।
क्या सोच रहा था, उसे खुद नहीं मालूम।
हड्डियों का पिंजर | कहानी
जब मैं पढ़ाई की पुस्तकें समाप्त कर चुका तो मेरे पिता ने मुझे वैद्यक सिखानी चाही और इस काम के लिए एक अनुभवी गुरु को नियुक्त कर दिया। मेरा नवीन गुरु केवल दे?...
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बहुत वासनाओं पर मन से - गीतांजलि
बहुत वासनाओं पर मन से हाय, रहा मर,
तुमने बचा लिया मुझको उनसे वंचित कर ।
संचित यह करुणा कठोर मेरा जीवन भर।
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तुमने बचा लिया मुझको उनसे वंचित कर ।
संचित यह करुणा कठोर मेरा जीवन भर।