प्रेम जनमेजय साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 3
मेरे व्यंग्य लेखन की राह बदलने वाले
उस उम्र में ‘आयुबाध्य' प्रेम के साथ-साथ मुबईया फिल्मों का प्रेम भी संग-संग पींग बढ़ाता था। पता नहीं कि फिल्मों के कारण मन में प्रेम का अंकुर फूटता था या म...
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कबीरा क्यों खड़ा बाजार
संपादक ने फोन पर कहा- कबीरा खड़ा बाजार में।
मैने पूछा – मॉस्क के साथ या बिना मॉस्क के?
संपादक कबीरी शैली में बोला-कबीर ने तो दूसरों के मास्क उतारे हैं, वो क...
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मैने पूछा – मॉस्क के साथ या बिना मॉस्क के?
संपादक कबीरी शैली में बोला-कबीर ने तो दूसरों के मास्क उतारे हैं, वो क...
आपात्काल में अकाल | कविता
(श्री नागार्जुन से क्षमा-याचना सहित)
बहुत दिनों तक जनता रोई
संसद रही उदास
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बहुत दिनों तक जनता रोई
संसद रही उदास