देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

प्रेम जनमेजय साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

Author Image

मेरे व्यंग्य लेखन की राह बदलने वाले

उस उम्र में ‘आयुबाध्य' प्रेम के साथ-साथ मुबईया फिल्मों का प्रेम भी संग-संग पींग बढ़ाता था। पता नहीं कि फिल्मों के कारण मन में प्रेम का अंकुर फूटता था या म...
पूरा पढ़ें...

कबीरा क्यों खड़ा बाजार

संपादक ने फोन पर कहा- कबीरा खड़ा बाजार में।
मैने पूछा – मॉस्क के साथ या बिना मॉस्क के?
संपादक कबीरी शैली में बोला-कबीर ने तो दूसरों के मास्क उतारे हैं, वो क...
पूरा पढ़ें...

आपात्काल में अकाल | कविता

(श्री नागार्जुन से क्षमा-याचना सहित)
बहुत दिनों तक जनता रोई
संसद रही उदास
पूरा पढ़ें...

प्रेम जनमेजय का जीवन परिचय (Biography)

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।