यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।

आपात्काल में अकाल | कविता

आपात्काल में अकाल | Hindi Poem by Prem Janmejay

(श्री नागार्जुन से क्षमा-याचना सहित)

बहुत दिनों तक जनता रोई
संसद रही उदास
बहुत दिनों तक पत्नी सोई
डरे पति के पास।
बहुत दिनों तक लगी देश में
जासूसों की गश्त
बहुत दिनों तक लेखकों की भी
हालत रही शिकस्त।

चुनाव हुए देश के अन्दर
कई युगों के बाद
फिर से पुरुष मर्द कहलाए
कई युगों के बाद
घर-घर में आजादी आई
कई युगों के बाद
मुन्ने ने किलकारी मारी
कई युगों के बाद।

- प्रेम जनमेजय 

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