अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ | Prabhudyal Shrivastava साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 10

प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ | Prabhudyal Shrivastava

अम्मू भाई का छक्का

"दादाजी मैं छक्का मारूँगा," अम्मू भाई ने क्रिकेट बैट लहराते हुये मुझसे कहा। वह एक हाथ में बाल लिये था, बोला, "प्लीज़ बाँलिंग करो न दादाजी।"
"अरे! अरे! इस कमरे म...
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घर का मतलब‌ 

धरती सुबह-सुबह छप्पर से,
लगी जोर से लड़ने।
उसकी ऊंचाई से चिढ़कर,
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दद्दू का पिद्दू

गोटिया और लूसी के दादाजी का नाम मस्त राम है। नाम के अनुरूप वह हमेशा मस्त ही रहते हैं। व्यर्थ की चिंताओं को पाल कर रखना उनकी आदतों में शुमार नहीं है ।अगर भू?...
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 गाँव चलें हम | बालगीत

चलो पिताजी गांव चलें हम,
दादाजी के पास। 
 
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चार बाल गीत

यात्रा करो टिकिट लेकर
टाँगे झोला कंधे पर
आया यहाँ टिकिट चेकर।
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हिंदी में | कविता

लेख लिखा मैंने हिंदी में,
लिखी कहानी हिंदी में
लंदन से वापस आकर फिर,
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छन्नूजी

दाल भात रोटी मिलती तो,
छन्नू नाक चढ़ाते।
पूड़ी परांठे रोज रोज ही,
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मछली की समझाइश‌

मेंढक बोला चलो सड़क पर,
जोरों से टर्रायें।
बादल सोया ओढ़ तानकर,
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मीठी वाणी

छत पर आकर बैठा कौवा,
कांव-कांव चिल्लाया|
मुन्नी को यह स्वर ना भाया,
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बूंदों की चौपाल 

हरे- हरे पत्तों पर बैठे,
हैं मोती के लाल।
बूंदों की चौपाल सजी है,
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प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ | Prabhudyal Shrivastava का जीवन परिचय (Biography)

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