हिंदी भाषा अपनी अनेक धाराओं के साथ प्रशस्त क्षेत्र में प्रखर गति से प्रकाशित हो रही है। - छविनाथ पांडेय।

मछली की समझाइश‌

मछली की समझाइश‌ | बालगीत

मेंढक बोला चलो सड़क पर,
जोरों से टर्रायें।
बादल सोया ओढ़ तानकर,
उसको शीघ्र जगायें।

मछली बोली पहले तो हम
लोगों को समझायें-
"पेड़ काटना बंद करें वे
पर्यावरण बचायें।

-प्रभुदयाल श्रीवास्तव

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