मुस्लिम शासन में हिंदी फारसी के साथ-साथ चलती रही पर कंपनी सरकार ने एक ओर फारसी पर हाथ साफ किया तो दूसरी ओर हिंदी पर। - चंद्रबली पांडेय।

नरेंद्र शर्मा साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 5

नरेंद्र शर्मा

गाँव की धरती

चमकीले पीले रंगों में अब डूब रही होगी धरती,
खेतों खेतों फूली होगी सरसों, हँसती होगी धरती!
पंचमी आज, ढलते जाड़ों की इस ढलती दोपहरी में
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जो समर में हो गए अमर

जो समर में हो गए अमर, मैं उनकी याद में
गा रही हूँ आज श्रद्धा-गीत धन्यवाद में
जो समर में हो गए अमर ...
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कबीर वाणी

हिन्दुअन की हिन्दुआई देखी
तुरकन की तुरकाई !
सदियों रहे साथ, पर दोनों
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ग्राम चित्र

मक्का के पीले आटे-सी
धूप ढल रही साँझ की!
देवालय में शंख बज उठा,
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जीवन

घडी-घड़ी गिन, घड़ी देखते काट रहा हूँ जीवन के दिन 
क्या सांसों को ढोते-ढोते ही बीतेंगे जीवन के दिन? 
सोते जगते, स्वप्न देखते रातें तो कट भी जाती हैं, 
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नरेंद्र शर्मा का जीवन परिचय (Biography)

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