अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

मैथिलीशरण गुप्त | Mathilishran Gupt साहित्य Hindi Literature Collections

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मैथिलीशरण गुप्त | Mathilishran Gupt

जल, रे दीपक, जल तू

जल, रे दीपक, जल तू।
जिनके आगे अँधियारा है, उनके लिए उजल तू॥
जोता, बोया, लुना जिन्होंने,
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मैथिलीशरण गुप्त | Mathilishran Gupt का जीवन परिचय (Biography)

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