भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

सआदत हसन मंटो साहित्य Hindi Literature Collections of Saadat Hasan Manto

कुल रचनाएँ: 7

सआदत हसन मंटो

उलाहना

"देखो यार। तुम ने ब्लैक मार्केट के दाम भी लिए और ऐसा रद्दी पेट्रोल दिया कि एक दुकान भी न जली।"
--मंटो
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बँटवारा

एक आदमी ने अपने लिए लकड़ी का एक बड़ा संदूक चुना। जब उसे उठाने लगा तो संदूक अपनी जगह से एक इंच न हिला।
एक शख्स ने, जिसे अपने मतलब की शायद कोई चीज मिल ही नहीं र?...
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जूता

हजूम ने रुख़ बदला और सर गंगाराम के बुत पर पिल पड़ा। लाठियां बरसाई गईं। ईंटें और पत्थर फेंके गए। एक ने मुंह पर तारकोल मल दिया। दूसरे ने बहुत-से पुराने जूते ?...
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लाइसेंस

अब्बू कोचवान बड़ा छैल छबीला था। उस का ताँगा घोड़ा भी शहर में नंबर वन था। कभी मामूली सवारी नहीं बिठाता था। उस के लगे-बंधे ग्राहक थे जिन से उस को रोज़ाना दस प...
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करामात | लघुकथा

लूटा हुआ माल बरामद करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरू किए।
लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात के अँधेरे में बाहर फेंकने लगे, कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने अपना माल...
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ख़बरदार | लघु-कथा

बलवाई मालिक मकान को बड़ी मुश्किलों से घसीटकर बाहर लाए।
कपड़े झाड़कर वह उठ खड़ा हुआ और बलवाइयों से कहने लगा, "तुम मुझे मार डालो, लेकिन ख़बरदार, जो मेरे रुपए-...
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टोबा टेकसिंह

बंटवारे के दो-तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि अख्लाकी कैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए, यानी जो मुसलमान पाग?...
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सआदत हसन मंटो का जीवन परिचय (Biography)

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