हिंदी भाषा अपनी अनेक धाराओं के साथ प्रशस्त क्षेत्र में प्रखर गति से प्रकाशित हो रही है। - छविनाथ पांडेय।

जैनन प्रसाद | फीजी साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

जैनन प्रसाद | फीजी

रावण या राम

रामायण के पन्नों में
रावण को देख कर,
काँप उठा मेरा मन
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गुरुदक्षिणा

सायक बिकते हैं
धनुः विद्या भी बिकती है
पर बिकते नहीं हैं तो केवल
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चीरहरण

हँस रहे हैं आज
कई दुशासन।
द्रोपदी को निर्वस्त्र देख।
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जैनन प्रसाद | फीजी का जीवन परिचय (Biography)

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