डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड | न्यूज़ीलैंड साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 11
ज़िंदगी तुझे सलाम
सोचा था अभी तो बहुत कुछ करना बाक़ी है
अभी तो घर भी नहीं बसाया
ना ही अभी किसी को अपना बनाया।
पूरा पढ़ें...
अभी तो घर भी नहीं बसाया
ना ही अभी किसी को अपना बनाया।
सफाई
पूछा हमसे किसी ने
तुम्हें अपनी सफाई में कुछ कहना है?
हमने भी इस प्रश्न पर कुछ गहराई से विचार किया।
पूरा पढ़ें...
तुम्हें अपनी सफाई में कुछ कहना है?
हमने भी इस प्रश्न पर कुछ गहराई से विचार किया।
क्षणिका
ना तुमने कुछ कहा, ना हमने कुछ कहा।
बस यूँ ही बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने
अपनी अपनी खामोशी में
पूरा पढ़ें...
बस यूँ ही बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने
अपनी अपनी खामोशी में