यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।

डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड | न्यूज़ीलैंड साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 11

डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड | न्यूज़ीलैंड

बापू से मुलाक़ात

कल रात सपने में
बापू से मुलाक़ात हो गई
बातें उनसे चार हो गई
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आखिर मैं हूँ कौन?

एक मानव...
नहीं।
मुझे तो धीरे-धीरे
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कुछ अनुभूतियाँ

दूर दूर तक फैला मिला आकाश
चारों ओर ऊँची पहाड़ियाँ
शांत नीरव वातावरण
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ज़िम्मेदारी

सामाजिक असंगति
और
सामाजिक परम्परा इनमें कोई सम्बन्ध है?
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आज ना जाने क्यों

आज ना जाने क्यों फिर से
याद आ गया
नानी का वह प्यार और दुलार।
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ज़िंदगी तुझे सलाम

सोचा था अभी तो बहुत कुछ करना बाक़ी है
अभी तो घर भी नहीं बसाया
ना ही अभी किसी को अपना बनाया।
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सफाई

पूछा हमसे किसी ने
तुम्हें अपनी सफाई में कुछ कहना है?
हमने भी इस प्रश्न पर कुछ गहराई से विचार किया।
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क्षणिकाएँ

कहा-सुनी
तुमने कहा, हमने सुना। 
हमने कहा, तुमने सुना। 
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क्षणिका

ना तुमने कुछ कहा, ना हमने कुछ कहा।
बस यूँ ही बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने
अपनी अपनी खामोशी में
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बापू

विश्व को हिंसा से
मुक्त कराने का बीड़ा उठाया था तुमने।
विश्व तो क्या
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मुस्कान

उन्होंने कहा-- 
तुम्हारी मुस्कान में
एक जादू है।
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डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड | न्यूज़ीलैंड का जीवन परिचय (Biography)

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