भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

दिव्या माथुर साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 7

दिव्या माथुर

2050

ऋचा की आँखों में उच्च वर्ग का सा इस्पात उतर आया, एकबारगी उसे  लगा कि वह भी इस्पात में ढल सकती है। गँवार लोग ही रोते हैं, उच्च वर्ग के लोगों के सपाट चेहरों प?...
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एडम और ईव

बात ज़रा सी थी; एक झन्नाटेदार थप्पड़ ईव के गाल पर पड़ा। वह संभल नहीं पाई, कुर्सी और मेज़ से टकराती हुई ज़मीन पर जा गिरी।  उसका बायां हाथ स्वतः गाल पर चला ग?...
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सांप-सीढ़ी

सिनेमाघर के घुप्प अंधेरे में भी राहुल की आंखें बरबस खन्ना-अंकल के उस हाथ पर थीं जो उसकी मम्मी के कंधों और कमर पर बार-बार बहक रहा था। मम्मी के अनुसार खन्ना-अ...
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अंतिम तीन दिन

अपने ही घर में माया चूहे सी चुपचाप घुसी और सीधे अपने शयनकक्ष में जाकर बिस्तर पर बैठ गई; स्तब्ध। जीवन में आज पहली बार मानो सोच के घोड़ों की लगाम उसके हाथ से ?...
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हिसाब बराबर

हम फूलों पर सोए
एक दफ़ा
फूल हम पर सोए
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पंगा

एक नई नवेली दुल्हन सी एक बीएमडब्ल्यू पन्ना के पीछे लहराती हुई सी चली आ रही थी, जैसे दुनिया से बेख़बर एक शराबी अपनी ही धुन में चला जा रहा हो या कि जीवन से ऊब क...
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फ़ौसफ़र

बिन्नी बुआ का सही नाम बिनीता है पर सब उन्हें प्यार से बिन्नी कहते हैं। बिन्नी बुआ के पालतु बिल्ले का नाम फ़ौसफ़र है और फ़ौसफ़र के नाम के पीछे भी एक मज़ेदा?...
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दिव्या माथुर का जीवन परिचय (Biography)

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