भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

हिसाब बराबर

हिसाब बराबर | Hindi Poem by Divya Mathur

हम फूलों पर सोए
एक दफ़ा
फूल हम पर सोए
एक दफ़ा
हिसाब बराबर।

- दिव्या माथुर

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