भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

सुदामा पांडेय धूमिल साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

सुदामा पांडेय धूमिल

धूमिल की अंतिम कविता

"शब्द किस तरह
कविता बनते हैं
इसे देखो
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रोटी और संसद

एक आदमी
रोटी बेलता है
एक आदमी रोटी खाता है
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बीस साल बाद

मेरे चेहरे में वे आँखें लौट आयी हैं
जिनसे मैंने पहली बार जंगल देखा है :
हरे रंग का एक ठोस सैलाब जिसमें सभी पेड़ डूब गए हैं।
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सुदामा पांडेय धूमिल का जीवन परिचय (Biography)

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