यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।

बाबू गुलाबराय | Babu Gulabrai साहित्य Hindi Literature Collections

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बाबू गुलाबराय | Babu Gulabrai

आशापञ्चक

आशा वेलि सुहावनी. शीतल जाको छांहि ।
जिहि प्रिय सुमन सुफलन ते, मधराई अधिकाहिं
आशा दीपक करत नीत, जिहि हिरदे में बास
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बाबू गुलाबराय | Babu Gulabrai का जीवन परिचय (Biography)

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