बाबू गुलाबराय | Babu Gulabrai साहित्य Hindi Literature Collections
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आशापञ्चक
आशा वेलि सुहावनी. शीतल जाको छांहि ।
जिहि प्रिय सुमन सुफलन ते, मधराई अधिकाहिं
आशा दीपक करत नीत, जिहि हिरदे में बास
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जिहि प्रिय सुमन सुफलन ते, मधराई अधिकाहिं
आशा दीपक करत नीत, जिहि हिरदे में बास