क्या देखा है तुमने नर को, नर के आगे हाथ पसारे? क्या देखे हैं तुमने उसकी, आँखों में खारे फ़व्वारे? देखे हैं? फिर भी कहते हो कि तुम नहीं हो विप्लवकारी?
"अपने छोटे-से जीवन में मैं न-जाने कहाँ-कहाँ घूमा हूँ। न-जाने कितने सान्ध्य-प्रकाश में मैंने मानसिक परिस्थितियों का विश्लेषण किया है; किन्तु..." मेरे मित्र ग...
कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ जिससे उथल-पुथल मच जाये, एक हिलोर इधर से आये, एक हिलोर उधर से आये, प्राणों के लाले पड़ जायें त्राहि-त्राहि स्वर नभ में छाये,