नागार्जुन | Nagarjuna साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 13

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भूले स्वाद बेर के

सीता हुई भूमिगत, सखी बनी सूपनखा
वचन बिसर गए देर के सबेर के
बन गया साहूकार लंकापति विभीषण

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अकाल और उसके बाद

कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास
कई दिनों तक कानी कुतिया सोयी उनके पास
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त

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इनाम | कहानी

हिरन का मांस खाते-खाते भेड़ियों के गले में हाड़ का एक काँटा अटक गया।
बेचारे का गला सूज आया। न वह कुछ खा सकता था, न कुछ पी सकता था। तकलीफ के मारे छटपटा रहा था?...

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एक सपना | काल्पनिक रेखाचित्र

गोरी सूरत, घनी-काली भौहे, छोटी-छोटी आँखें, नुकीली नाक, बडे-बडे बाल...
गुछी हुई विरल मूछोंवाला यह मुस्कराता चेहरा किसका है?
यह चेहरा, प्रेमचंद का है।

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पीपल के पत्तों पर | गीत

पीपल के पत्तों पर फिसल रही चाँदनी
नालियों के भीगे हुए पेट पर, पास ही
जम रही, घुल रही, पिघल रही चाँदनी

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बाक़ी बच गया अंडा | कविता

पाँच पूत भारत माता के, दुश्मन था खूंखार
गोली खाकर एक मर गया, बाक़ी रह गये चार
चार पूत भारत माता के, चारों चतुर-प्रवीन

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लोगे मोल? | कविता

लोगे मोल?
लोगे मोल?
यहाँ नहीं लज्जा का योग

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तीनों बंदर बापू के | कविता

बापू के भी ताऊ निकले तीनों बंदर बापू के
सरल सूत्र उलझाऊ निकले तीनों बंदर बापू के
सचमुच जीवनदानी निकले तीनों बंदर बापू के

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कालिदास! सच-सच बतलाना ! | कविता

कालिदास! सच-सच बतलाना !
इंदुमती के मृत्यु शोक से
अज रोया या तुम रोये थे ?

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बापू महान | कविता

बापू महान, बापू महान!
ओ परम तपस्वी परम वीर
ओ सुकृति शिरोमणि, ओ सुधीर

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तेरे दरबार में क्या चलता है ? | कविता

तेरे दरबार में
क्या चलता है ?
मराठी-हिन्दी

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घिन तो नहीं आती है ? | कविता

पूरी स्पीड में है ट्राम
खाती है दचके पे दचके
सटता है बदन से बदन-

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म‌ंत्र

ॐ श‌ब्द ही ब्रह्म है..
ॐ श‌ब्द्, और श‌ब्द, और श‌ब्द, और श‌ब्द
ॐ प्रण‌व‌, ॐ न‌ाद, ॐ मुद्रायें

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नागार्जुन | Nagarjuna का जीवन परिचय