सीता हुई भूमिगत, सखी बनी सूपनखा वचन बिसर गए देर के सबेर के बन गया साहूकार लंकापति विभीषण
कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोयी उनके पास कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त
हिरन का मांस खाते-खाते भेड़ियों के गले में हाड़ का एक काँटा अटक गया। बेचारे का गला सूज आया। न वह कुछ खा सकता था, न कुछ पी सकता था। तकलीफ के मारे छटपटा रहा था?...
गोरी सूरत, घनी-काली भौहे, छोटी-छोटी आँखें, नुकीली नाक, बडे-बडे बाल... गुछी हुई विरल मूछोंवाला यह मुस्कराता चेहरा किसका है? यह चेहरा, प्रेमचंद का है।
पीपल के पत्तों पर फिसल रही चाँदनी नालियों के भीगे हुए पेट पर, पास ही जम रही, घुल रही, पिघल रही चाँदनी
पाँच पूत भारत माता के, दुश्मन था खूंखार गोली खाकर एक मर गया, बाक़ी रह गये चार चार पूत भारत माता के, चारों चतुर-प्रवीन
लोगे मोल? लोगे मोल? यहाँ नहीं लज्जा का योग
बापू के भी ताऊ निकले तीनों बंदर बापू के सरल सूत्र उलझाऊ निकले तीनों बंदर बापू के सचमुच जीवनदानी निकले तीनों बंदर बापू के
कालिदास! सच-सच बतलाना ! इंदुमती के मृत्यु शोक से अज रोया या तुम रोये थे ?
बापू महान, बापू महान! ओ परम तपस्वी परम वीर ओ सुकृति शिरोमणि, ओ सुधीर
तेरे दरबार में क्या चलता है ? मराठी-हिन्दी
पूरी स्पीड में है ट्राम खाती है दचके पे दचके सटता है बदन से बदन-
ॐ शब्द ही ब्रह्म है.. ॐ शब्द्, और शब्द, और शब्द, और शब्द ॐ प्रणव, ॐ नाद, ॐ मुद्रायें