हैरान परेशान, ये हिन्दोस्तान है ये होंठ तो अपने हैं, पर किसकी जुबान है जुगनू मना रहे हैं जश्न, आप देखिए
वो भटक रहा था यहाँ - वहाँ ढूंढा ना जाने कहाँ - कहाँ जग चादर तान के सोता था
उसने मुझे जब हिन्दी में बात करते हुए सुना, तो गौर से देखा और अपने मित्र से कहा--
शाम होते ही वो कौन-से रास्ते हैं, जिन पर मैं चल पड़ता हूँ वो किसके पैरों के निशान हैं, जिनका मैं पीछा करता हूँ
छुपा लेता हूँ अपने आक्रोश को नाखून में छुपा लेता हूँ
आशा है तुम सकुशल होगी शुभकामनाएं और तुम्हारी भावी यात्रा के बारे में कुछ राय
जीवन से बाजी में, समय देखो जीत गया आयु का अमृत घट, पल-पल कर रीत गया जीवन से बाजी में, समय देखो जीत गया
जैसे मेरे हैं, वैसे सबके हों प्रभु उसने सिर्फ आँखें नहीं दी, दृष्टि भी दी,