कल रात सपने में बापू से मुलाक़ात हो गई बातें उनसे चार हो गई
एक मानव... नहीं। मुझे तो धीरे-धीरे
दूर दूर तक फैला मिला आकाश चारों ओर ऊँची पहाड़ियाँ शांत नीरव वातावरण
सामाजिक असंगति और सामाजिक परम्परा इनमें कोई सम्बन्ध है?
आज ना जाने क्यों फिर से याद आ गया नानी का वह प्यार और दुलार।
सोचा था अभी तो बहुत कुछ करना बाक़ी है अभी तो घर भी नहीं बसाया ना ही अभी किसी को अपना बनाया।
पूछा हमसे किसी ने तुम्हें अपनी सफाई में कुछ कहना है? हमने भी इस प्रश्न पर कुछ गहराई से विचार किया।
कहा-सुनी तुमने कहा, हमने सुना। हमने कहा, तुमने सुना।
ना तुमने कुछ कहा, ना हमने कुछ कहा। बस यूँ ही बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने अपनी अपनी खामोशी में
विश्व को हिंसा से मुक्त कराने का बीड़ा उठाया था तुमने। विश्व तो क्या
उन्होंने कहा-- तुम्हारी मुस्कान में एक जादू है।