जैनन प्रसाद | फीजी साहित्य Hindi Literature Collections

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रावण या राम

रामायण के पन्नों में
रावण को देख कर,
काँप उठा मेरा मन

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गुरुदक्षिणा

सायक बिकते हैं
धनुः विद्या भी बिकती है
पर बिकते नहीं हैं तो केवल

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चीरहरण

हँस रहे हैं आज
कई दुशासन।
द्रोपदी को निर्वस्त्र देख।

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जैनन प्रसाद | फीजी का जीवन परिचय