रामायण के पन्नों में रावण को देख कर, काँप उठा मेरा मन
सायक बिकते हैं धनुः विद्या भी बिकती है पर बिकते नहीं हैं तो केवल
हँस रहे हैं आज कई दुशासन। द्रोपदी को निर्वस्त्र देख।