देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

सीखा पशुओं से | व्यंग्य कविता

कुत्ते से सीखी चापलूसी
मलाई चट करना बता गई पूसी
बकरे से अहं ब्रह्मास्मि-मैं-मैं
कहां तक जानवरों को धन्यवाद दें !
बैलों से सीखा खटना,
दुम्बे से चोट मारने के लिए पीछे हटना,
भेड़िए से अपने लिए
खुद कानून बनाना,
भेंड़ों से आंख मूंदकर
पीछे-पीछे आना,
लोमड़ी ने सिखलाई चालाकी
बताओ, अब और क्या रह गया बाकी ?

- गोपालप्रसाद व्यास
( हास्य सागर )

 

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