विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वाल्टर चेनिंग

राजकुमार की प्रतिज्ञा | Rajkumar Ki Pritigya

राजकुमार की प्रतिज्ञा | यशपाल जैन का बाल उपन्यास

यशपाल ने अनेक बालोपयोगी कहानियां लिखी, पर उपन्यास नहीं लिखा था। अचानक उन्हें आभास हुआ कि बच्चों के लिए उपन्यास भी लिखना चाहिए और उनकी लेखनी उस दिशा में चल पड़ी। लगभग सवा महीने में यह रचना पूरी हो गई।

उपन्यास इतना रोचक है कि बच्चे इसे एक बार पढ़ना आरम्भ करेंगे तो बिना समाप्त किये छोड़ नहीं सकेंगे। वस्तुत: लेखक की भाषा बड़ी सहज-सरल है और शैली में अपने ढंग का अनोखा प्रवाह है। यद्यपि इसे उन्होंने मुख्यत: बच्चे के लिए लिखा है, तथापि बड़े पढ़ेंगे तो उन्हें भी आनंद आये बिना नहीं रहेगा। कहानी लेखक ने ऐसी चुनी है, जो छोटे-बड़े सबके लिए आकर्षक है।

 

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