भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

लूटकर ले जाएंगे | ग़ज़ल

रचनाकार: राजगोपाल सिंह
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लूटकर ले जाएंगे - राजगोपाल सिंह की ग़ज़ल | Hindi Ghazal by Rajgopal Singh

लूटकर ले जाएंगे सब देखते रह जाओगे
पत्थरों की वन्दना करने से तुम क्या पाओगे

मांगने से पहले कुछ भी, सोच लो, फिर मांगना
एक चौखट के लिए क्या पेड़ को कटवाओगे

अपने ख़ूनी शौक़ की ख़ातिर हमें ऐ रहबरो
तीतरों की भाँति तुम कितना कहो लड़वाओगे

फ़स्ल बंदूकों की खेतों में न बोना दोस्तो
रोटियों के नाम पर कल गोलियाँ ही खाओगे

- राजगोपाल सिंह

 

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