देहात का विरला ही कोई मुसलमान प्रचलित उर्दू भाषा के दस प्रतिशत शब्दों को समझ पाता है। - साँवलिया बिहारीलाल वर्मा।

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रचनाकार: रोहित कुमार 'हैप्पी' (न्यूज़ीलैंड)
रेटिंग: 5/5 (1 मत)

खोजिए | छोटी कविता | Small Hindi Poem

भीड़ है
शब्द हैं,
नगाड़े हैं।
लेकिन, गुम है--
इंसान, ओज और ताल।

खोजिए, मिल जाएं शायद--
भीड़ में इंसान
शब्दों में ओज
और
नगाड़ों में ताल। 

-रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

 

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